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Kaal Sarp Dosh: ऐसे करे काल सर्प दोष के लक्षणों की पहचान ,यहां जाने कैसे पाए इससे छुटकारा
 

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार व्यक्ति की कुंडली में ग्रह नक्षत्रों के योग से प्रायः कुछ ना कुछशुभ और अशुभ योगों निर्माण होता रहता है। 

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ज्योतिषशास्त्र के जानकारों का कहना है कि कालसर्प दोष के अशुभ प्रभाव से शारीरिक मानसिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है

 कुंडली में स्थित इस योग से जहां जातक को लाभ होता है ,वही अशुभ योग दोष से जीवन में कुछ समय के लिए ही सही मगर परेशानियों का सामना जरूर करना पड़ता है। ऐसी अशुभ योगों में से एक है कालसर्प दोष। इस दोष को शापित माना गया है दरअसल ज्योतिषशास्त्र के जानकारों का कहना है कि कालसर्प दोष के अशुभ प्रभाव से शारीरिक मानसिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है ऐसे में ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जानते हैं कि कालसर्प दोष के लक्षण और उपचार के बारे में। 

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कालसर्प दोष से जातक को संतान कष्ट का सामना करना पड़ता है

 ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब कभी कुंडली में कालसर्प दोष उत्पन्न होता है तो इसकी अवधि में जातक को कई प्रकार की आर्थिक ,शारीरिक और मानसिक परेशानियों से गुजरना पड़ता है कालसर्प दोष से उत्पन्न कष्टों का अंदाजा वही लगा सकता है जिसकी कुंडली में यह दोष है इसके साथ ही कालसर्प दोष से जातक को संतान कष्ट का सामना करना पड़ता है वहीं जातक कम  समय में बार-बार नौकरी बदलता है तो यह कालसर्प दोष का लक्षण है। इसके अलावा अलग नौकरी में स्थायित्व काआभाव  रहता है तो ऐसे में ज्योतिषशास्त्र के जानकार का कालसर्प  के दोष को संगीन  मानते हैं। कुंडली में ग्रह नक्षत्र से संबंधित दोषों के निवारण के लिए भी ज्योतिषशास्त्र में उपाय बताए गए हैं। 

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दोष से मुक्ति पाने के लिए जातक को घर में पूजा स्थल पर मोर पंख धारण किए हुए श्री कृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर लगानी चाहिए

जानकार बताते हैं कि इस दोष से मुक्ति पाने के लिए जातक को घर में पूजा स्थल पर मोर पंख धारण किए हुए श्री कृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर लगानी चाहिए। इसके साथ ही नियमित रूप से उनकी पूजा-अर्चना करनी चाहिए इसके अलावा पूजा के दौरान 'ॐ  नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का 108 बार जाप जरूर करें। कालसर्प दोष से छुटकारा पाने के लिए सोमवार, मासिक शिवरात्रि ,महाशिवरात्रि पर रुद्राभिषेक करें।  इसके साथ ही मिट्टी से सवा लाख महादेव बनाकर उनकी पूजा करने से कालसर्प दोष का असर कम होता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार नाग देवता की पूजा करने से इस दोष से मुक्ति मिलती है ऐसे में हर महीने की पंचमी तिथि को अनंत , वासुकि , तक्षक ,कर्कोटक ,पदमा ,महापद्मा ,शंख  और  कुलिक  की पूजा करनी चाहिए नाग देवता की पूजा करने से महादेव की पूजा करना जरूरी है।