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अगहन महीने में गणेश जी की संकष्ट चतुर्थी पर करे व्रत ,होगी हर संकट से बचाव
 

9 नवंबर से अगहन  महीना शुरू हो गया है 12 तारीख को कृष्ण पक्ष के  चतुर्थी रहेगी मार्गशीष  महीना होने से होने से इस दिन गणाधिप रूप में गणेश  की पूजा करने का विधान है। स्कन्द और ब्रह्मवैवर्त पुराण के मुताबिक स्थिति पर गणेश की पूजा विशेष पूजा के साथ व्रत रखने से परेशानियां दूर होती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती है। 

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संकट चतुर्थी के दिन गणेश जी का विधि -विधान से पूजा होती है अपने नाम के मुताबिक ही  व्रत है यानी से सभी कष्टों का हरण करने वाला। माना जाता है मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश की आराधना और व्रत करने से सभी तरह के कष्टों से मुक्ति मिलती है। संकट चतुर्थी व्रत शादीशुदा महिलाएं पति की लंबी उम्र सौभाग्य की कामना से करती है वहीं कुंवारी कन्याओ  ने भी अच्छा पति पाने के लिए दिनभर व्रत रखकर शाम को भगवान गणेश की पूजा करती है। 

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इस दिन सूर्योदय से पहले उठे और स्नान करे और सूर्य को जल चढ़ाने के बाद भगवान गणेश के दर्शन करें। गणेश जी की मूर्ति के सामने बैठकर दिनभर व्रत और पूजा का संकल्प लें। इसमें पूरे दिन फल और दूध भी लिया जाना चाहिए और अन्न नहीं  खाना चाहिए। इस तरह मदद करने से मनोकामना पूरी होती है। भगवान गणेश की पूजा सुबह और शाम यानी दोनों समय की जानी चाहिए।  शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत पूरा करना चाहिए पूजा के लिए पूर्व उत्तर दिशा में चौकी स्थापित करें भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़े बिछा ले  गणेश जी की मूर्ति पर जल ,अक्षत, दूर्वा, घास ,लड्डू, पान  परहशद स्वरूप ग्रहण  करें अक्षत और फूल लेकर गणपति से अपनी मनोकामना कहे  उसके बाद 'ॐ गंग गणपतए नमः 'मंत्र बोलते हुए  गणेश जी को प्रणाम करने के बाद आरती करें।