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सूर्य भगवान के इस मंदिर में अगर गए नॉनवेज खाकर तो हो जायेंगे बर्बाद

 

उड़ीसा के कोणार्क के अलावा लखनऊ में भी 1100 साल  पुराना को सूर्य देव का मंदिर है जहां दर्शन करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। रामायण कालीन इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि जब लक्ष्मण सीता माता को वन  में छोड़ने जा रहे थे तो कुछ समय के लिए उन्होंने इसी मंदिर में आराम  किया था आज  ये  मंदिर पूरी तरह से सुनसान है। 

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इस मंदिर में महंत 3008 ब्रह्मलीन महंत जंगम गिरी महाराज ने कड़ी तपस्या की थी

इस मंदिर के महंत कुरुक्षेत्र गिरी महाराज का कहना है कि इस मंदिर में जिस भी मांसहारी भक्त  ने प्रवेश किया वह बर्बाद हो गया।और  यही वजह है कि यहां पर बहुत कम लोग आते हैं। इस मंदिर में महंत 3008 ब्रह्मलीन महंत जंगम गिरी महाराज ने कड़ी तपस्या की थी वह भी इस मंदिर में किसी को प्रवेश नहीं करने देते थे हैरान करने वाली बात है कि इन सबके बावजूद इस पूरे मंदिर के बाहर और अंदर कहीं भी ऐसा बोर्ड नहीं लगा हुआ है जिसमें इस में प्रवेश करने से पहले किसी भी भक्तों को इस बारे कि इस बारे में जानकारी हो। 

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सूर्यदेव एक ऐसे देवता हैं जिनकी पूजा उपासना करने से इंसान के मान-सम्मान और प्रतिष्ठा हासिल होती है

यहां के फूल विक्रेता ने बताया कि यहां बहुत कम लोग आते हैं और सबसे खास बात यह है कि इस मंदिर के बाहर ही यहां के महंत बैठते हैं हालांकि किसी भी मान्यता की पुष्टि नहीं करते हैं। क्योंकि शास्त्रों के मुताबिक सूर्यदेव एक ऐसे देवता हैं जिनकी पूजा उपासना करने से इंसान के मान-सम्मान और प्रतिष्ठा हासिल होती है। वैसे तो आपने शनिदेव की कई मूर्तियां देखी होंगी लेकिन यहां पर जो शनिदेव है उनका मनोकामना पूर्ण स्वरूप विराजमान है। एक बेहद प्राचीन पीपल का वृक्ष है जिसके नीचे गौरी शिव शंकर हैं। नौ देवियां भी मौजूद हैं, सरस्वती मां भी हैं। राम दरबार भी है और एक प्राचीन बरगद के पेड़ के नीचे हनुमान जी विराजमान हैं. जिनके कंधे पर प्रभु श्री राम और लक्ष्मण जी हैं।