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पितृ पक्ष में कौनसी चीजे सेवन करके पितृ को कर रहे है नाराज ,यहां जाने कैसे मिलता है पितरों को भोजन
 

हिंदू धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व है पितरों की मुक्ति के लिए विधि -विधान से श्राद्ध कर्म विधि किए जाते हैं 16 दिनों तक चलने वाले पितृपक्ष में पितरों का तर्पण श्राद्ध और पिंडदान समेत कई अनुष्ठान किए जाते हैं इस दौरान  कई परहेज और परेशानियां भी बरतनी चाहिए मान्यता है कि इस अवधि में ऐसी कुछ चीजों का सेवन ना करें जिससे पित्तर  नाराज हो। 

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पितृपक्ष के दौरान घर को साफ -सुथरा रखें इस दौरान घर में किचन में बासी या झूठा खाना ना रखे रसोई में गंदा बर्तन रखने से पितृ नाराज होते हैं ज्योतिष के अनुसार पितृपक्ष में लहसुन ,प्याज ,मांसाहार, शराब ,सिगरेट व तामसिक भोजन ,जमीन में उगने वाली सब्जियां जैसे मूली ,आलू ,अरबी सब्जियों का सेवन ना करें चना ,मसूर की दाल का सेवन भी करना वर्जित है दुर्गा सप्तशती और सुंदरकांड का पाठ करने से शांति मिलती है बल्कि व्यक्ति के जीवन की बाधाएं दूर होती है रोज  घर में  गीता का पाठ करें ऐसा करने से आपकी सभी परेशानियां मुक्त होगी पितरों को लेकर लोगों के मन में हमेशा बनी रहती है कि जैसे कौन है ,क्यों नाराज होते हैं और उनकी नाराजगी से क्या है पितृ दोष क्या होता है यदि हमारे पितृ हमसे नाराज हैं तो हमें कैसे मालूम चलेगा। 

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 मनुष्य लोक से उपस्थित लोग हैं पितृ लोक  के ऊपर सूर्यलोक  और सबसे ऊपर स्वर्ग  हैं कुछ लोग शंका करते हैं  श्राद्ध में समर्पित की गई वस्तुएं पितरों को कैसे मिलती है कर्मों की भिन्नता की वजह से मरने के बाद गतियां भी अलग-अलग होती है कोई देवता ,कोई पितृ ,कोई प्रेत ,कोई हाथी ,कोई चींटी  कोई वृक्ष  और कोई तृण  बन जाता है तब मन में शंका होती है कि छोटे से पिंड में से अलग अलग होने में पितरों की तृप्ति कैसे मिलती है। 

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पितरों और देवताओं की योनि ऐसी है कि वे दूर कहीं से भी कहीं बातें सुन लेते हैं और दूर की पूजा ग्रहण कर लेते हैं दूर से कहीं की गई स्थितियां से ही प्रसन्न हो जाते हैं पितृपक्ष में तीन पीढ़ियों तक के पिता पक्ष व तीन पीढ़ियों तक के माता पक्ष के पूर्वजों के लिए  तीन पीढयों का  किया जाता है इन्हीं को पितृ  कहते हैं जिस तिथि को माता-पिता का देहांत होता है उसी तिथि को पितृपक्ष में उनका श्राद्ध किया जाता है।