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ब्रह्मा जी ने की थी करवा चौथ के व्रत की शुरुआत ,यहां जाने कौनसे राज्य में होने लगा था पहले ये व्रत
 

हिंदू धर्म में करवा चौथ की व्रत   को विधिपूर्वक करने की प्रथा है इस व्रत को पति को लंबी उम्र के लिए किया जाता है वैसे तो भारत में कई सारे  व्रत रखे जाते हैं लेकिन करवा चौथ का काफी महत्व है भारत के कई राज्यों में यह व्रत रखा जाता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत के किस राज्य में करवा चौथ के व्रत की शुरुआत हुई थी। 

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करवा चौथ दो शब्दों से मिलकर बना है आपको बता दें की  करवा शब्द का मतलब मिट्टी का बर्तन होता है और  चौथ  का मतलब चतुर्थी होता है इस व्रत को विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए करती है इस व्रत को ब्रह्मा जी ने  देवो  की पत्नियों को करने के लिए कहा था कि युद्ध के दौरान सभी देवताओं को विजय प्राप्त हो सके देव ने अपनी पत्नियों ने अपने-अपने पतियों के लिए निर्जला व्रत  किया था और बाद में चांद कोअध्र्य देकर पूजा करी थी और हिंदू धर्म के अनुसार तभी से करवा चौथ के व्रत की शुरुआत हुई थी। 

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ऐसा माना जाता है कि इस व्रत  की वजह से सभी देवों को विजय प्राप्त हुई इसीलिए इस व्रत को रखने को बहुत अहम है भारत में करवा चौथ से पहले के समय में विशेष रुप से सिर्फ उत्तर प्रदेश ,पंजाब ,दिल्ली, हरियाणा मध्य प्रदेश और राजस्थान में ही मनाया जाता था लेकिन अब पूरे देश में विवाहित महिलाएं इस त्यौहार को खासतौर से मनाती है। 

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राजाओं के शासनकाल में समय जब मुगलों ने आक्रमण किया था तब अपने राज्य की रक्षा के लिए कई सेनिको  ने युद्ध किया था उस समय उनकी पत्नियों ने अपने-अपने पतियों की सुरक्षा और कल्याण के लिए प्रार्थना करी थी और पूरे दिन निर्जला व्रत किया था इसके अलावा पंजाब में पंजाब में भी विशेष रूप से व्रत किया जाता है पंजाब में सर्किल का काफी महत्व है करवा चौथ के दिन महिलाओं को सूर्य ग्रह से पहले सरकी जो सरकी देती है सरगी  की थाली  सास को भी तैयार करनी होती है इसमें कई पकवान होते है साथ में कई सारे ड्राई फ्रूट्स भी दिए जाते है। कई राज्यों में अलग-अलग तरह से यह व्रत करने की प्रथा है।