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8 दिसम्बर को खत्म हो रहा है अगहन मॉस ,यहां जाने इन दिनों के सबसे खास त्यौहार
 

अगहन  महीने के शुक्ल पक्ष 24 नवंबर गुरुवार से शुरू हो रहा है जो कि 8 दिसंबर तक चलेगा तिथियों की घट बढ़  नहीं होने से पकवाड़ा पूरे 15 दिनों का रहेगा। मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष में तीज त्यौहारों के 6 दिन रहेंगे । मार्गशीष यानी अगहन महीना काफी पवित्र माना जाता है यह श्रीकृष्ण को बहुत प्रिय है शास्त्रों में इसे श्री कृष्ण का स्वरूप ही कहा गया है। 

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हिंदू पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष की शुक्ल पक्ष की एकादशी को भगवान श्री कृष्ण ने कुरुक्षेत्र के मैदान में धनुष धारी अर्जुन को गीता का उपदेश सुनाया था गीता के एक श्लोक में श्रीकृष्ण मार्गशीर्ष मास की महिमा बताते हुए कहते हैं कि गायन करने योग्य श्रुतियों में मैं बृहत्साम, छंदों में गायत्री और मास में मार्गशीर्ष और ऋतुओं में बसंत हूं। शास्त्रों में मार्गशीष का महत्व बताते हुए कहा गया कि ,हिंदू पंचांग के अनुसार इस पवित्र मास में गंगा ,यमुना जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने से रोग दोष और परेशानियों से मुक्ति मिलती है। 

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28 नवंबर :सोमवार :

इस दिन विवाह पंचमी है त्रेता युग में इसी तिथि पर श्री राम और सीता का विवाह हुआ था इस दिन श्री राम और सीता की विशेष पूजा करें और रामायण पूजा का पाठ करें। 

29 नवंबर, मंगलवार :

इस दिन चंपा षष्टि व्रत रहेगा ,इसमें भगवान शिव और कार्तिकेय की पूजा की जाती है। कहते हैं स्कंद पुराण के अनुसार इस दिन कार्तिकेय की पूजा करने से सभी परेशानियां दूर होती है। 

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3 दिसंबर ,शनिवार :

इस दिन मोक्षदा एकादशी है इस दिन व्रत के साथ श्री कृष्ण और भगवान विष्णु की विशेष पूजा होती है इस दिन गीता जयंती पर वह भी मनाया जाता है इस पर्व पर नदी में स्नान करने और दान पुण्य करने की परंपरा है। 

5 दिसंबर सोमवार :

यह साल का आखरी सोम प्रदोष है सोमवार को त्रयोदशी का संयोग होने से इस दिन भगवान शिव पार्वती की विशेष पूजा से सुख और समृद्धि बढ़ती है यह व्रत सभी दोष दूर करता है। 

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7 दिसंबर बुधवार :

इस दिन दत्तात्रेय जयंती है इस  दिन ऋषि अत्रि और सती अनुसूया के बेटे दत्तात्रेय का जन्म हुआ था।त्रिदेवों का अंश होने से शैव और वैष्णव दोनों ही भगवान दत्तात्रेय की पूजा करते हैं।


 8 दिसंबर गुरुवार :

इस दिन  मार्गषीर्श  महीने की पूर्णिमा है यह इसी महीने का आखिरी दिन रहेगा महीने की पूर्णिमा पर्व पर स्नान दान और पूजा पाठ करने की परंपरा है।