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ऐसे ऑफिसर जो 19 बार फेल हुए ,एक को स्कुल से से बाहर निकाला ,एक दसवीं में 2 बार फेल ,फिर भी आज है आरएस
 

एक लड़का अलग-अलग एग्जाम में 19 बार फेल हुआ एक लड़के को दसवीं पास करने में 2 साल लगे एक लड़की को  हाफ इयरली एग्जाम में फेल हो गई वहीं एक लड़के को दसवीं में कम नंबर आने के कारण स्कूल से निकाल दिया गया सोचिए अगर मार्कशीट ही योग्यता का पैमाना है तो इन चारों का क्या होता लेकिन ऐसा नहीं हुआ मार्कशीट किसी की भी योग्यता का पैमाना नहीं है इनका भी नहीं था जो  19 बार फेल हुआ एग्जाम में 55 वी रैंक हासिल की 2 बार में 10 वीं पास करने वाला केवल 23 साल की उम्र में आईपीएस बन गया जो लड़की हाफ इयरली एग्जाम में फेल हो गई वहीं आज श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की प्रिंसिपल   है और जिस लड़के को स्कूल में  एडमिशन  देने से इंकार कर दिया वह आज पुलिस में डीआईजी है आज हम आपको कुछ ऐसे ही लोगों के बारे में बताते हैं जो कम नंबर आने पर भी आगे बड़े अफसर बने   इसका जवाब वह बच्चे जो एग्जाम कम नंबर आने पर इतने तनाव में आ जाते हैं कि सुसाइड कर लेते हैं डिप्रेशन में आ जाते हैं ऐसे में यह उदाहरण उनके लिए सबसे बढ़िया है। 

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आर एस दलपत सिंह मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी में वित्त नियंत्रक अधिकारी के पद पर पोस्टेड है दलपत सिंह से बेहतर शायद ही कोई जानता होगा कि फेलियर का मतलब क्या है वह अलग-अलग एग्जाम में 19 बार फेल हुए जब भी एग्जाम देते पड़ोसी दोस्त रिश्तेदार मजाक उड़ाते दलपत सिंह राठौड़ ने 1993 में दसवीं में एवरेज नंबर से पास की थी 12वीं में 1993 से 1994 तक फेल हुए 1995 ग्रेस मार्क्स से पास हुए  इसके बाद फर्स्ट ईयर में 1996 से 99 तक 4 बार फेल है और 2000 में बीबीए पूरी की उन्होंने कई एग्जाम दी लेकिन वह फेल हो गए 2003 में उनके बचपन के दोस्त अविनाश संपत को आईएएस  में ऑल इंडिया में दूसरी रैंक मिली इसलिए उन्होंने तय किया कि वह भी इसका एग्जाम देंगे लेकिन दूसरे टेस्ट में ओवरेज हो गई इसके बाद भी हार नहीं मानी और आरएस का विकल्प खुला उसी में जुट गए और तीसरे चांस में आर एस परीक्षा में 2008 में  55 वि रैंक लेने में कामयाब हुए  है इसका रिजल्ट 2011 में आया और उन्हें लेखा सेवा का कैडर मिला। 

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जगदीश 2018 में 23 साल की उम्र में आईपीएस बने 26 साल की  दीक्षांत  समारोह के बाद उन्होंने गुजरात के कैडर  ज्वाइन  की और फिलहाल गुजराती  दाहोद  एसपी के पद पर पोस्टेड है उन्हें तेज  तर्रार पुलिस ऑफिसर्स ऑफिसर माना जाता है इतने काबिल ऑफिसर भी दसवीं में फेल हो गए थे राजस्थान के बाड़मेर जिले के छोटे से गांव बायतु में रहने वाले जगदीश भगड़वा ने दूसरे टेस्ट में दसवीं एग्जाम भी क्लियर की थी और 12वीं में उन्हें केवल 38 अंक मिले थे लेकिन  नम्बर भी जगदीश का हौसला नहीं डिगा पाए  उन्हें कड़ी लगन और मेहनत के साथ पढ़ाई की और 2018 में भारतीय सिविल सेवा की परीक्षा दी और उन्होंने 486 रैंक हासिल की। 

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बीकानेर  के रहने वाले आईपीएस आकाश कुलहरी यूपी पुलिस के फायर डिपार्टमेंट के डीआईजी हैं इससे पहले वो कानपुर के एडिशनल पुलिस में  एडिशनल कमिश्नर  भी रह चुके हैं आकाश बीकानेर के  केंद्रीय विद्यालय में पढ़ते थे  साल 1996 में दसवीं का एग्जाम दिया  नंबर 1 कम नंबर आने के बाद स्कूल ने उन्हें निकाल दिया आकाश ने हार नहीं मानी और इसके बाद कड़ी मेहनत की और 12वीं के बोर्ड एग्जाम 85% नंबर हासिल किए इसके बाद 2001 में दुग्गर कॉलेज बीकानेर से बीकॉम और दिल्ली की जैन यूनिवर्सिटी से एम कॉम किया 2005 में एमफिल  की  साल 2006 में पहले प्रयास में ही आकाश ने सिविल सर्विसेज की परीक्षा पास कर ली।