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मोदी सरकार की अब इन कम्पनियो पर नजर ,नहीं हो सकती पैसे लेकर गायब
 

अब सरकार ने आम लोगों के हितों की रक्षा के लिए निधि  कंपनियों को नियंत्रित करने वाले नियमो में संसोधन किया है कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने बुधवार को एक बयान जारी करके कहा है कि निधियों के रूप में कार्य करने की इच्छुक सूचीबद्ध कंपनियों को जमा स्वीकार करने से पहले केंद्र सरकार से मंजूरी प्राप्त करनी होगी। 

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सरकार ने यह कदम छोटे निवेशकों के हितों को देखते हुए उठाया क्योंकि कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिसमें कंपनियां लोगों से पैसे लेकर रातो -रात गायब हो गई है सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि आम जनता के हितों के लिए यह अनिवार्य है कि इसका सदस्य बनने से पहले केंद्र सरकार निधि कंपनी के रूप में घोषणा हासिल की जाए इसके अलावा ₹1000000 शेयर पूंजी के साथ निधि कंपनी के रूप में खुद को नीति घोषित करने के लिए न्यूनतम  200 की सदस्यता के साथ एनडीएच-4 फॉर्म के जरिये आवेदन करना होगा ऐसी कंपनियों का स्वामित्व 120 दिन के अंदर ₹2000000 होना चाहि। 

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 वहीं नए नियमों में कंपनी के प्रवर्तकों और निदेशकों को नियमों में निर्धारित उपयुक्त व्यक्ति के मानदंड को पूरा करना होगा मंत्रालय ने बताया कि समय पर निपटान के लिए केंद्र सरकार के रूप में कंपनियों की तरफ से दायर आवेदनों की प्राप्ति के 45 दिन के अंदर कोई निर्णय नहीं लेती है तो मंजूरी को स्वीकृत माना जाएगा उल्लेखनीय है कि आरबीआई द्वारा एनबीएफसी और बैंकों के लिए दिशा-निर्देश निधि कंपनी पर लागू नहीं होते हैं निधि फाइनेंस कंपनी एक गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) ही होती हैं मगर इसके कार्य व नियम NBFC से कुछ अलग होते हैं निधि कंपनी कुछ मेंबरों से मिलकर बनी हुई वित्तीय संस्थान होती हैं।