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राजस्थान के खाटू श्याम जी है महाभारत काल के श्री कृष्ण के सबसे प्रिय शख्स ,यहां जाने उनके बारे अनकहे रहस्य
 

हिंदू धर्म में खाटू श्याम जी कलयुग में कृष्ण के अवतार में पूजे जाते हैं जिन्हें श्रीकृष्ण से वरदान मिला था कि कलयुग में उनके नाम से ही पूजे  जाएंगे असल यह माना जाता है कि श्री कृष्ण बर्बरीक के बलिदान से काफी खुश थे और उन्हें वरदान मिला था कि कलयुग में के आने पर  श्याम के नाम से पूजा जाएंगे जो भी भक्त तुम्हारे दरबार में आकर सच्चे दिल से पूजा करेगा उसका तुम उद्धार करोगे। 

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अगर आप सच्चे मन से और प्रेम भाव से पूजा करेंगे तो आपकी हर मनोकामनाएं पूरी होगी आज हम आपको राजस्थान के खाटू श्याम के बारे में दिलचस्प बातें बताते हैं। 

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 कृष्ण की परीक्षा में सफल हुए बर्बरीक


भगवान श्री कृष्ण और बर्बरीक एक पीपल के पेड़ के नीचे खड़े थे श्री कृष्ण ने उन्हें चुनौती दी कि उन्हें एक बाण से पेड़ की सभी पत्ते बरसाने हैं एक पता श्री कृष्ण ने अपने पैर के नीचे दबा लिया ऐसे में बाणश्री कृष्ण के आसपास चक्कर लगाने  लगा तभी प्रभु समझ गए ये काफी शक्तिशाली है।।

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श्रीकृष्ण ने की शीश के दान की मांग 


 तभी श्री कृष्ण ने बर्बरीक से दान की इच्छा व्यक्त की बर्बरीक के कहने पर जब श्री कृष्ण जी ने उनसे शीश मांगा तो एक बार तो बर्बरीक  घबरा गए वीर बर्बरीक बोले  एक साधारण ब्राह्मण इस तरह  की मांग नहीं सकता बर्बरीक उनसे अपने वास्तविक रूप से अवगत कराने की प्रार्थना करने लगे तब   असल रूप में आ गए। 

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श्री कृष्ण ने दिए दर्शन 


श्री कृष्ण के रुप में आने के बाद उन्हें बर्बरीक को समझाने लगे की युद्ध आरंभ होने से पहले सर्वश्रेष्ठ क्षत्रिय किस चीज की आहुति देनी पड़ती है।  बर्बरीक ने जब उनसे आखिर तक महाभारत युद्ध देखने की बात कही, तो कृष्ण मान गए। उनकेशीश को युद्धभूमि के  पास पहाड़ी पर स्थापित कर दिया जहां सारे युद्ध को देख रहे थे। श्री कृष्ण बर्बरीक के दान इतने खुश हुए कि उन्होंने कहा कि कलयुग में तू श्याम नाम से पूजा जाओगे बर्बरीक का शीश राजस्थान के सीकर जिले के पास खाटू नगर में दफनाया गया इसलिए उन्हें खाटू धाम का बाबा कहते हैं। 

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दूध की बहने लगी थी धारा -


एक बार देखा गया कि वहां से दूध की धारा बहने लगी ,खुदाई करने के बाद खाटू जी वहा  से प्रकट हुए  कहते हैं कि खाटू नगर के राजा को मंदिर बनाने का स्थापित करने कासपना आया  था इस तरह मंदिर का निर्माण कराया गया।