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सरकार के बीमा योजना के दावे खोखले ,लगभग 80 परसेंट इंडियन खुद भरते है जेब से बिल ,यहां जाने क्यों
 

देश के हर नागरिक को स्वास्थ्य बीमा कवर देने का लक्ष्य रखने वाली सरकार हर साल बीमा कवर  देने वाली योजनाओं पर हजारों करोड़ खर्च करती है मगर फिर भी एक आदमी आम आदमी का मेडिकल बिल कुछ खास नहीं घटता ही एक रिपोर्ट के अनुसार हर साल 5.5  करोड़ भारतीय मेडिकल बिल के बोझ  की वजह से गरीब हो जाते हैं। 

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इसके 3 बड़े कारण है :सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन कि नेशनल हेल्थ प्रोफाइल 2021 की बोर्ड के अनुसार देश की करीब 86 पॉइंट 4 आबादी किसी भी तरह के हेल्थ इंश्योरेंस कवर्ड नहीं है  सरकारी इंश्योरेंस योजनाओं में   सिर्फ 11% आबादी कवर्ड  है जो इंश्योरेंस  कवर्ड है उन्हें भी हॉस्पिटल में भर्ती होने पर खर्च का बड़ा हिस्सा अपनी जेब से भरना होते हैं यह वह खर्च होते हैं जो इंश्योरेंस की कवर नहीं होते इसे out-of-pocket मेडिकल एक्सपेंस एस कहा जाता है  आउट ऑफ़ पॉकेट का खर्च  सरकारी हॉस्पिटल में कम होता है मगर बीएमसी जिरियाट्रिक्स का बुजुर्गों पर एक शोध बताता है कि सिर्फ 35 परसेंट ही सरकारी अस्पतालों में भर्ती होते हैं प्राइवेट अस्पतालों में out-of-pocket का खर्चा बढ़ जाता है स्वास्थ्य से जुड़ी आपदाओं के बावजूद हमारे देश में मेडिकल इंश्योरेंस लोगों की प्राथमिकता नहीं है आज भी ग्रामीण इलाकों में 85 परसेंट से ज्यादा लोग कोई स्वास्थ्य बीमा नहीं रखते सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजनाओं का कवरेज यहां शहरों के मुकाबले ज्यादा है मगर इससे सिर्फ गरीब तबका ही शामिल है। 

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देश में तीन तरह के अस्पताल काम करते हैं सरकारी ,निजी और ट्रस्ट या एनजीओ के अस्पताल नेशनल हेल्थ प्रोफाइल 2021 के अनुसार किसी भी तरह के हॉस्पिटल में भर्ती होने पर एक बार के हॉस्पिटलाइजेशन का खर्च में से औसतन 80 परसेंट से ज्यादा लोगों को अपनी जेब से देना पड़ रहा है यह खर्च  सरकारी अस्पताल में कम और निजी अस्पतालों में कई गुना ज्यादा है शोध में शामिल बुजुर्गों में से 3% से ज्यादा सीजीएचएस जैसे सरकारी बीमा योजना में कवर्ड है  इसके बावजूद उनकी out-of-pocket खर्चे में कुछ खास अंतर नहीं पड़ा अमूमन कोई भी स्वास्थ्य बीमा सिर्फ अस्पताल में भर्ती होने पर खर्च कवर करता हैएक औसत भारतीय के मेडिकल बिल का बड़ा हिस्सा अस्पताल में भर्ती हुए बिना करवाए इलाज से बनता है।

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 मौसमी बीमारियों के लिए उनके अस्पताल की ओपीडी प्राइवेट क्लिनिक में इलाज किया जाता है एक बार का खर्च निजी  हॉस्पिटल में हजार रुपए का आता है सरकार आबादी की कमजोर तबके ,अपने कर्मचारियों और लोअर इनकम ग्रुप के लिए अलग-अलग स्वास्थ्य बीमा ही चलाती है यह जनता के टैक्स पर चलने वाले बीमा योजना है इसलिए इन्हें पब्लिक फंडेड मेडिकल इंश्योरेंस स्कीम कहते हैं इन योजनाओं पर खर्च तो बहुत ज्यादा है मगर  कवर्ड प्रति व्यक्ति मिलने वाले लाभ के आधार पर देखें तो इनका ज्यादा फायदा नहीं है।