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निमोनिया को ना समझे छोटी -मोटी बीमारी ,ये बड़ी सेलिब्रिटी गंवा चुके इससे जान

 

निमोनिया , यह कैंसर या एड्स की तरह जानलेवा तो नहीं है पर इसे बीमारियों की दुनिया का बच्चा समझने की भूल ना करें। अक्सर छोटे बच्चे खासकर नवजात को निमोनिया होने के बारे में सुना है। लेकिन बुजुर्ग और युवा भी इस बीमारी की चपेट में आकर जान गंवा सकते हैं। खासकर दिल्ली जैसे महानगरों में रहने वाले लोग प्रदूषण के कारण निमोनिया से पीड़ित होते हैं। 

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निमोनिया ग्रीक शब्द न्यूमॉन से निकला है न्यूमोन का मतलब है फ़ेफबे यानि लंग्स  

मशहूर अभिनेता अमिताभ बच्चन और उनकी बहू ऐश्वर्या राय को भी निमोनिया हो चुका है। अब अमिताभ बच्चन की कई फिल्मों में को स्टार  रहे शशि कपूर अंतिम समय में कई बीमारियों से जूझ रहे थे, निमोनिया उनमें से एक था ,वही लता मंगेशकर भी इस बीमारी की वजह से ही इस दुनिया से रुखसत हुई थी।लंबे समय तक उनका निमोनिया का इलाज चला था  उम्र के साथ होने वाली बीमारी जब बिगड़ती है तो निमोनिया का रूप ले लेती है। निमोनिया ग्रीक शब्द न्यूमॉन से निकला है न्यूमोन का मतलब है फ़ेफबे यानि लंग्स  इसलिए जब निमोनिया बोलते हैं तो इसका मतलब फेफड़े की बीमारी होता है दूसरे शब्दों में कहें तो फेफड़ों में इन्फेक्शन या सूजन आना ही निमोनिया है। 

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निमोनिया या फेफड़े की दूसरी बीमारियों के कारण फेफड़ों में फ्लूट जमा हो सकता है

फेफड़ों में पानी भरना निमोनिया नहीं है निमोनिया या फेफड़े की दूसरी बीमारियों के कारण फेफड़ों में फ्लूट जमा हो सकता है इसे मेडिकल कंडीशन को पलमनरी एडेमा कहा जाता है डॉक्टर के अनुसार फेफड़े के एलेवेली में फ्लूट बढ़ने लगता है इससे ब्लड में ऑक्सीजन की सप्लाई ठीक से नहीं हो पाती हो ना ही कार्बन डाइऑक्साइड शरीर से बाहर हो पाती है ऐसे में रेस्पिरेट्री फैलियर होने की आशंका बढ़ जाती है। फेफड़ों में पानी भरने की और भी कई कारण हो सकते हैं जैसे किडनी फेल होना, हार्ट  का ठीक से ब्लड पंप नहीं करना ,लीवर सिरोसिस खून में इन्फेक्शन दवाइयों का रिएक्शन आदि। 

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जब हम सांस लेते हैं तो हमारे लंग्स  गुब्बारे की तरह फूलते हैं और सांस छोड़ने पर सिकुड़ते हैं। सामान्य रूप से फेफड़े सॉफ्ट स्ट्रक्चर के होते हैं लेकिन निमोनिया होने पर फेफड़ों की हालत फूले  हुए गुब्बारे में बालू भरने जैसी हो जाती है या नहीं फूलेंगे  और ना ही सिकुडेंगे  इस स्थिति में फेफड़े सॉफ्ट ना रहकर ईजी डिस्ट्रक्चर के हो जाते हैं दूसरे शब्दों में कहें इंफेक्शन की वजह से फेफड़े सख्त हो जाते हैं और हमें सांस लेने में तकलीफ हो जाती है।