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कौनसी वेक्सीन है कोरोना की सबसे सुरक्षित वेक्सीन ,यहां जाने बूस्टर डोज लगाना है क्यों है जरूरी
 

कोरोना वेक्सीन से मिला प्रोटक्शन ज्यादा समय तक शरीर कोई खतरनाक वायरस से ज्यादा समय तक सुरक्षा नहीं दे पाता एकसमाचार एजेंसी के अनुसार , स्टडी में दावा है कि  वेक्सीन इस वायरस के प्रति शरीर में  अपने आप बनी इम्युनिटी से बेहतर सुरक्षा प्रदान करती है हालांकि ये  वायरस समय के साथ खुद को बदल रहा है ऐसे में शरीर के साथ उसके खिलाफ बनी इम्युनिटी  भी ज्यादा समय तक काम नहीं करती मतलब अगर इस बार इसकी चपेट में आने से फिर से बचना है तो वैक्सीन की बूस्टर डोज लेनी पड़ेगी। 

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स्टडी में यह भी पाया गया कि कोरोनावायरस के इन्फेक्शन से बचने के लिए एंटीबॉडी की तुलना में वैक्सीन से अच्छी प्रतिरक्षा मिलती है इसलिए बूस्टर डोज  लेना आवश्यक है इस अध्ययन में इस बात की पड़ताल की गई है कोरोना के खिलाफ इस स्टडी में ये भी पता लगाया गया कि कौन सी वैक्सीन कितने समय तक शरीर को कोरोना वायरस से बचा पाती  ‘प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज’ (पीएनएएस) की ये स्टडी 15 जून को प्रकाशित हुई है इसमें बताया गया है की कोरोना वेक्सीन शरीर में अपने आप बनाई गयी एंटीबॉडी से ज्यादा सुकरशा देते है ऐसे में बूस्टर डोज लेना जरूरी है इस अध्धयन में ये भी बताया गया है की कोरोना खिलाफ टीकों से मिली इम्युनिटी कब तक काम करती है और शरीर के अंदर एंटीबॉडी से अपने आप बनी प्रतिरोधक क्षमता कब घटने लगती है कोरोना से निपटने की प्रभावी रणनीति बनाने के लिए इस बात की जानकारी देना बहुत जरूरी है। 

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 विश्लेषण के दौरान चार सामान्य कोरोना वैक्सीन के वायरस की स्पाइक प्रोटीन  IgG के हमले से निपटने की एंटीबॉडी की क्षमता पर भी गौर किया गया रिपोर्ट के मुताबिक अध्ययन से पता चला है कि एक बार कोरोना  की चपेट में आने के बाद शरीर में बनी प्राकृतिक इम्युनिटी  औसतन 21 पॉइंट 5 महीनों तक सुरक्षा प्रदान करती है वह फाइजर बायोएनटेकऔर मॉडर्ना की एमआरएनए वैक्सीन ने प्राकृतिक संक्रमण की तुलना में एंटीबॉडी का स्तर बढ़ाने में मदद की, जिसने करीब 29.6 महीनों तक कोरोना संक्रमण से सुरक्षा प्रदान की। 

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 शोध के दौरान देखा गयाजी ऑक्सफोर्ड एस्ट्रेजेनेका  और जॉनसन एंड जॉनसन द्वारा बनाई गई वायरल इन्फेक्शन से प्राकृतिक प्रतिरक्षा जितनी एंटीबॉडी तैयार हुई उन्होंने  22 पॉइंट 4 महीने और 20 पॉइंट 5 महीने तक संक्रमण से बचाव किया शोध के निष्कर्षों के आधार पर वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना वायरस से बचाव करना है तो बूस्टर डोज लगाना ही होगा।