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ED छापेमारी में जो पैसे पकड़ती है उनका क्या होता है ,यहां जाने
 

 ED हाई प्रोफाइल केसेज  छापे मारने को लेकर सुर्खियों में है  एड ने 1 हफ्ते के अंदर बंगाल की ममता सरकार के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी के करीबी अर्पिता के मुखर्जी के घर छापेमारी से ₹500000000 से अधिक केस और 5 किलो से ज्यादा सोना बरामद कर चुकी ED छापेमारी के बाद  अर्पिता के घर के नोटों के ढेर की तस्वीरें वायरल हो रही है ईडी ,सीबीआई, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को मनी लॉन्ड्रिंग इनकम टैक्स फ्रॉड या अन्य अपराधिक गतिविधियों में जांच पूछताछ छापेमारी करने में चल अचल संपत्तियों को जब्त करने का अधिकार होता है। 

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ये एजेंसियां जब्त पैसे को अपनी कस्टडी में लेती हैं और फिर अदालत के आदेश से या तो उस पैसे को आरोपी को वापस कर दिया जाता है या फिर वो सरकार की संपत्ति बन जाता है इस सवाल का जवाब जानने के लिए आप सुप्रीम कोर्ट के वकील  विराग गुप्ता के  कुछ विचार सुन सकते हैं सुप्रीम कोर्ट के वकील ने कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसी ने‘’केंद्रीय जांच एजेंसियों जैसे-ED, CBI और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को किसी मा एक गिरफ्तारी और पूछताछ और दूसरा उससे संबंधित सबूत इकट्ठा करने के लिए छापेमारी जांच एजेंसी से छापे मारती है वह अलग-अलग सूचनाओं पर आधारित होती है इसे जरूरी नहीं है कि एक आरोपी के यहां एक ही बार छापा मारे जाये बल्कि बार छापेमारी कई चरणों में हो सकती है। 

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वकील के अनुसार अगर ED की बात करे तो उसे प्रीवेंशन आफ मनी लांड्रिंग एक्ट 2002 यानी PMLA 2002 तहत अगर कस्टम डिपार्टमेंट है तो कस्टम एक्ट के तहत और अगर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट है तो उसे इनकम टैक्स एक्ट के तहत संपत्ति जप्त करने का अधिकार होता है जांच एजेंसी से कानून के तहत काम करती है उसी की तैयारी से छापा मारने जप्त करने और जब सामान को माल खानेया भंडार गढ़ में जमा करने का अधिकार होता है छापे में बरामद की गई चीजें बरामद होती है इनमें पेपर ,डाक्यूमेंट्स   या कोई कीमती सामान जैसे सोने चांदी के गहने मिलते हैं विराग ने बताया कि छापेमारी में जब्त की गई चीजों का पंचनामा बनाया जाता है पंचनामा जांच एजेंसी का आयोजन जांच अधिकारी बनाता हैपंचनामा जांच एजेंसी का IO यानी जांच अधिकारी बनाता है। पंचनामे पर दो स्वतंत्र गवाहों के हस्ताक्षर होते हैं। साथ ही इस पर जिस व्यक्ति का सामान जब्त होता है, उसके भी हस्ताक्षर होते हैं। पंचनामा बनने के बाद जब्ती का सामान केस प्रॉपर्टी बन जाता है पंचनामा में इस बात का जिक्र होता है कि कुल कितने पैसे बरामद हुई है कितनी गड्डियां कितने 200-500 और अन्य नोट है जबकि अन्य केश जिसमे अगर नोट पर किसी तरह के निशान हो या कुछ लिखा हो तो लिफाफे में उसे जांच एजेंसी अपने पास जमा कर लेती है जिससे हाई कोर्ट में सबूत के तौर पर पेश किया जाता है वही बाकी पैसों को बैंकों में जमा कर दिया जाता है जांच एजेंसिया जब्त किए गए पैसों को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया या स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में केंद्र सरकार के खाते में जमा करा देती हैं। 

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  वहीं अगर ईडी को के पास PMLA के सेक्शन 5 के तहत संपत्ति को जब्त  करने का अधिकार हैअदालत में संपत्ति की जब्ती साबित होने पर इस संपत्ति को PMLA के सेक्शन 9 के तहत सरकार कब्जे में ले लेती है विराग के अनुसार ’जब ED किसी की प्रॉपर्टी को अटैच करती है, तो उस पर बोर्ड लगा दिया जाता है, जिस पर लिखा होता है इस संपत्ति की खरीद-बिक्री या इसका इस्तेमाल नहीं हो सकता है।