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भारत के गेहूँ को सड़ा हुआ बताकर क्या तुर्की भारत के खिलाफ साजिश ,ऐसे हुआ बड़ा खुलासा
 

 भारत से तुर्की और मिश्र भेजी गई गेहूं की खेप को ठुकराए जाने का मामला इस समय सुर्खियों में बना हुआ है तुर्की ने भारत की यह हमें रूबेला वायरस होने की शिकायत की थी इसके बाद गेहूं के खेत इजराइल के बंदरगाह अभी भी फंसे होने की रिपोर्ट भी आई है इसके गेहूँ की तुर्की भेजने वाली कंपनी आईटीसी की एग्रो बिजनेस विभाग के सीईओ बयान आया है जिसमें उन्होंने गेहूं खराब होने की खबरों से इंकार किया है। 

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 कंपनी के एग्रो बिजनेस विभाग के रजनी कांत राय ने कहा कि उन्होंने गेहूं की जो खेप तुर्की भेजी गयी है वह क्वालिटी के मानकों पर  खरे उतरे है उन्होंने कहा कि  55 हजार टन  गेहूँ की खेप डच की एक कंपनी कमोडिटीज को बेची गई थी  डच कंपनी ने गेहूं की क्वालिटी टेस्ट के लिए एक स्विस कंपनी एसजीएस को चुना था उन्होंने कहा कि  आईटीसी  ने क्वालिटी गेहूं की डिलीवरी की थी और इस खेप को मई के मध्य में रवाना किया गया था इसके बाद हमें पता चला कि आईटीसी ने ये खेप तुर्की के खरीददार को बेच दी  बाद में हमे पता चला की तुर्की में हमारी इस खेप को ठुकरा  आईटीसी और  ETG   दोनों को इस बिल के लिए भुगतान किया जा चुका है। 

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उन्होंने कहा कि लेकिन है ना ही हमे  और न ही  ETG  को गेहूं की खेप  को ठुकराए जाने का पता चला गेहूँ  में रूबेला वायरस होने की और प्रोटीन की मात्रा कम होने की खबरें केवल अफवाह है रॉय ने कहा कि खेप  कभी मिश्र भेजी ही नहीं गई अभी यह  खेप  इजरायल के  बंदरगाह पर  अनलोड होने का इंतजार कर रही है राय के इस बयान से संकेत मिलता है कि इस खेप  को नया खरीददार मिल गया है कोई एक अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी ट्रेडिंग कंपनी के अधिकारी ने पहचान ना बताने की शर्त पर बताया कि इसके पीछे व्यवसायिक या भूराजनीतिक कारण हो सकते हैं गेहूं की गुणवत्ता का मुद्दा उठाने से लगता है कि वैश्वीकरण सप्लायर के तौर पर भारत की प्रतिष्ठा को नष्ट करने की कोशिश की जा रही है। 

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एक ट्रेड एनालिस्ट चंद्रशेखरन ने इंटरव्यू में कहा कि यूरोप के कुछ मुट्ठी भर ट्रेडर्स मध्य पूर्व और अफ्रीका के बाजारों के गेहूं व्यापार को नियंत्रित करते हैं उन्होंने कहा कि भारत के गेहूं में रूबेला वायरस होना एक   मिथक है जिसे तुर्की ने गढ़ा  है रोहित के मुताबिक आईटीसी ने 2021-22 में लगभग 1800000 टन गेहूं का निर्यात किया था कंपनी ने इस साल मई में 1300000 टन गेहूं निर्यात किया था उन्होंने कहा कि लेकिन की भी किसी भी खेप में कोई समस्या की शिकायत नहीं आई लेकिन जो गेहूं तुर्की भेजा गया था मैं उत्तम क्वालिटी का था वे मध्यप्रदेश का गेहूं था इसमें प्रोटीन की मात्रा लगभग 14 फ़ीसदी है भारत ने 13 मई को गेहूं के निर्यात पर बैन लगा दिया इसके बाद भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी आलोचना का सामना करना पड़ा था भारत ने यह कदम घरेलू स्तर पर खाद्य कीमतों में इजाफा करने के उद्देश्य से किया था। 

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भारत विश्व में गेहूं के व्यापार का महत्वपूर्ण भागीदार रहा है मौजूदा गेहूं संकट भारत के लिए एक अवसर की तरह सामने आया है  उन्होंने कहा कि दरअसल तुर्की यूक्रेन के उड़ीसा बंदरगाह पर फंसे गेहूं को हासिल करना चाहता है ऐसा करके वैश्विक गेहूं मार्केट पर नियंत्रण करने की कोशिश कर रहा है अगर यूक्रेन रूस और तुर्की के बीच चल रही बातचीत सफल हो जाती है तो बड़ी मात्रा में यूक्रेन में फंसा  गेहूं नियंत्रित तरीके से वैश्विक बाजारों तक पहुंचेगा   उन्होंने उन्होंने कहा कि भारत केभारत के गेहूं को ठुकरा कर देने की कोशिश कर रहा है  की जल्दी ही बड़ी मात्रा में गेहूं की सप्लाई होने वाली है और तुर्की ट्रांसपोर्टेशन करेगा उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में भारत शायद शक्तिशाली ट्रेड लॉबी और वैश्विक जियो पॉलिटिक्स का शिकार बन सकता है।