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यूके चीन से ज्यादा भारत के डेटा की करता है जासूसी ,हर पोस्ट पर रहती है उसकी नजर
 

भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ  मोरिशीश में  जाकर लोगों के अकाउंट अकाउंट में तांक -झांक  को लेकर विवादों के घिर गयी  लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में ही लोगों के इंटरनेट के मॉनिटर की सरकारी एजेंसियां कर रही है। 

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शायद आपने इसके बारे में सुना हो लेकिन क्या आप जानते हैं यह अमेरिका की खुफिया एजेंसी NSA  भी आपकी ईमेल या व्हाट्सएप चैट पर नजर रखती है 2013 में ऐसे ही पूर्व कर्मचारी एडवर्ड स्नोडेन के लिए दस्तावेजों में यह बात सामने आई थी कि अमेरिकी पूरी दुनिया में फाइबर ऑप्टिक टेप के जरिए लोगों के  इंटरनेट ट्रेफिक  पर नजर रखता है खास बात यह है कि इन दस्तावेजों में लीक हुए  एक मैप के अनुसार अमेरिका की खुफिया एजेंसी चीन से भी ज्यादा डाटा भारत और पाकिस्तान का इख्ठा  करती थी उस समय यह सामने आया था कि अमेरिका की निगरानी लिस्ट में भारत पांचवें नंबर पर है भारत से 63 करोड इंटेलीजेंट सूचनाएं अमेरिका ने ली थी मगर विपक्ष और  सरकार ने आज तक इसे मुद्दा नहीं बनाया कारण सरकार खुद भी आपके डाटा पर निगाह रखती है। 

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2015 में चीन की टेलीकॉम कंपनी हुआवेई को मॉरीशस की राजधानी में सर्विलांस सिस्टम इनस्टॉल करने का ठेका मिला था इसमें मॉरिशस टेलीकॉम कंपनी किसी और प्रधानमंत्री अप्रवींद जगुनॉथ के करीबी शेरी सिंह की भूमिका अहम मानी जा रही थी इस प्रोजेक्ट पर काम के दौरान ही हुआवेई को मॉरिशस की दूसरे सबसे बड़े शहर रॉडरीगज तक हाई स्पीड इंटरनेट पहुंचाने के लिए 700 किलोमीटर अंदर सेंटर टेबलेट केबल बिछाने का भी ठेका मिल गया था। 

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 अब यह संदेह जताया  जा रहा है कि इस बहाने चीन मॉरिशस में अपना टेलीकम्युनिकेशन इंटेलिजेंस बेस  बना सकता है पिछले माह मॉरीशस टेलीकॉम के CEO शेरी सिंह ने यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया कि प्रधानमंत्री ने उन्हें आदेश दिया था कि भारतीय खुफिया एजेंसी को बेई-ड्यु-जाकाटे द्वीप पर बने सबमरीन केबल स्टेशन का एक्सेस दे दें इसे मॉरीशस की विपक्षी पार्टियों ने देश की संप्रभुता पर खतरा बताते हुए प्रधानमंत्री से इस्तीफा तक मांग लिया प्रधानमंत्री प्रवींद जगुनॉथ खुले तौर पर कह चुके हैं कि चीन की मंशा पर शक की वजह से उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मदद मांगी थी। भारत ने अब तक इस पूरे मसले पर आधिकारिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है।