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चीन को मात देने के लिए ताइवान ने तैयार कर रखी है ये स्ट्रेटेजी ,गुरिल्ला युद्ध में माहिर है इतने लाख ताइवानी
 

चीन की तमाम धमकियों के बावजूद नैंसी पेलोसी  ताईवान आयी और  पूरा 1 दिन गुजार कर वापस चली गई ऐसे में एक्सपर्ट आशंका जता रहे हैं कि  नेंसी ताईवान  की यात्रा से बौखलाया चीन ताइवान पर हमला भी कर सकता है चीनी सेना ने ताइवान के चारों तरफ मिलिट्री ड्रिल भी शुरू कर दी है ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रोफेसर डॉनल्ड रॉथवेल डी डब्ल्यू ने कहा कि नैंसी पॉलिसी का   इस तरह से ताइवान जाना राष्ट्रपति शी जिनपिंग को सीधी चुनौती देना इसी साल चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की 20 वीं कांग्रेश होनी है जिसमें शी जिनपिंग लगातार तीसरा राष्ट्रपति का कार्यकाल पाने का दावा करेंगे ऐसे में नेंसी पेलोसी की  यात्रा के दावे को कमजोर कर सकती है इसलिए वह इस कदम का कड़ा जवाब दे सकते हैं वही पेलोसी  के ताइवान में जाते ही चीन ने नॉर्थ साउथ वेस्ट और साउथ ईस्ट में ताइवान के जल और हवाई क्षेत्र में मिलिट्री यानी सैन्य अभ्यास की घोषणा कर दी है। 

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चीनी समाचार एजेंसी के अनुसार हथियारों और गोला-बारूद किया जाएगा PLA ईस्टर्न थिएटर कमांड के प्रवक्ता सीनियर कर्नल शी यी ने कहा कि सैन्य अभ्यास के दौरान लॉन्ग रेज लाइव फायर शूटिंग की जाएगी। साथ ही मिसाइल का भी टेस्ट होगा ताइवान को कुछ ही देशों ने मान्यता दी है ताइवान को ज्यादातर  देश चीन का हिस्सा मानते हैं अमेरिका का भी ताइवान के साथ आधिकारिक रूप से राजनयिक संबंध नहीं हैं लेकिन अमेरिका ताइवान रिलेशंस एक्ट के तहतहथियार बेचता है इस कानून में कहा गया है कि ताइवान की आत्म रक्षा के लिए जरूरी मदद करेंगे अक्टूबर 2021 में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा था कि चीन अगर ताइवान पर हमला करता है तो अमेरिका ताइवान का बचाव करेगा यह अमेरिका के पुराने रुख से अलग लाइन थी ताइवान चीन जैसे विशाल शक्ति  से निपटने के लिए एसिमिट्रिक वॉरफेयर के मेथड को अपनाया है। इसे पार्कुपाइन स्ट्रैटेजी भी कहते हैं इसका उद्देश्य  युद्ध को दुश्मन के लिए ज्यादा से ज्यादा कठिन और महंगा बनाना होता है ताइवानएंटी-एयर, एंटी-टैंक और एंटी-शिप हथियारों और गोला-बारूद के बड़े भंडार को इकट्‌ठा कर रखा है इसमें ड्रोन और मोबाइल कोस्टल डिफेंस क्रूज मिसाइल यानी सीडीसीएम जैसे कम लागत वाले युद्ध पोत शामिल है । ये चीन के महंगे नेवल शिप और नेवल इक्विपमेंट को नष्ट करने की कैपेसिटी रखते हैं। 

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 ताइवान चारों तरफ से समुद्र से घिरा हुआ है   इस पर कब्जा करने के लिए चीन को बड़ी संख्या में सैनिकों बख्तरबंद वाहन। हथियार। गोला। बारू।  फूड मेडिकल सप्लाई और फ्यूल को उस पार ले जाने की जरूरत होगी यह केवल समुंदर से ही सब संभव है क्योंकि एअरलिफ्ट विमानों के बेड़े में सीमित क्षमता होती है ताइवान इलाकों में दीपों की एक श्रृंखला  भी है इनमें से कुछ चीनी तटों  के पास है इन द्वीपों पर पहले से लगे निगरानी इक्विपमेंट चीन के तटों से चलने वाले पहले फ्लीट्स या बेड़े का पता लगा सकते हैं। इससे ताइवान की सेना को मल्टीलेयर्ड सी डिफेंस के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा। 

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युद्ध के समय ताइवान की टैक्टिस अपने डिफेंस सिस्टम जैसे कि एयरक्रॉफ्ट और एंटी बैलिस्टिक डिफेंस सिस्टम को बचाने की होगी इन्ही  डिफेंस सिस्टम से ताइवान चीन की बैलिस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर खत्म कर सकता है पिछले  कुछ सालों में ताइवान अमेरिका से दर्जनों एडवांस फाइटर जेट खरीद चुका है ताइवान एयरक्राफ्ट को सबसे ज्यादा सुरक्षा वाले बेस  में रखा है साथ ही पायलेट्स को एयरपोर्ट पर बमबारी होने की स्थिति में हाईवे पर उतारने की ट्रेनिंग भी दी जा रही है वहीं अमेरिका ने युद्ध की स्थिति में ताईवान को डिफेंस सिस्टम  इंटेलिजेंस सपोर्ट देने की बात कही है इन सभी उपायों से ताइवान को चीन कोई संदेश देने में मदद मिलेगी  यदि युद्ध छिड़ता है तो यह लंबा महंगा और काफी खून खराबे वाला हो सकता है।