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जानिये मौसम विभाग कैसे पता लगाता है की कब, कहा औऱ कितनी बारिश होगी
 

एक रिपोर्ट के अनुसार, मौसम का बदलाव एक स्थान या समय पर हवा की स्थिति के हिसाब से होता है। यह प्रक्रिया लगातार चलती रहती है और इन हवा की स्थिति के जरिए मौसम का पूर्वानुमान लगाना काफी चुनौतीपूर्ण कार्य है। मौसम के पूर्वानुमान की प्रक्रिया अलग अलग स्थितियों पर जुटाए गए डेटा के आधार पर की जाती है और उन डेटा का अध्ययन करके अनुमान लगाया जाता है। वर्तमान स्थिति और उसके बदलाव का मात्रात्मक डेटा का विश्लेषण ही मौसम का पूर्वानुमान है।

जिन स्थितियों को डेटा जुटाया जाता है, उनमें जमीनी अवलोकन, विमान से अवलोकन, रेडियो ध्वनि, डॉपलर रडार, सैटेलाइट आदि शामिल है। फिर इन सूचनाओं को मौसम विज्ञान केंद्र को भेजी जाती है, जहां इस डेटा के आधार पर वैज्ञानिक पूर्वानुमान लगाते हैं। हालांकि, इसमें हाई-स्पीड कम्प्यूटर, ऊपरी हवा के नक्शे आदि का भी अहम रोल होता है। डेटा और इन नक्शों के जरिए अंदाजा लगाया जाता है।बता दें कि यह अनुमान भी कई आधार पर लगाया जाता है, जैसे एक अवलोकन लंबे समय के लिए होता है तो एक उसी दिन का अनुमान होता है।

जैसे कई बार साल में मॉनसून कैसा रहेगा उशकी जानकारी लेनी होती है तो कई बार तूफान अगले तीन घंटों में कहां रहेगा। इसलिए समय के आधार पर अलग-अलग पूर्वानुमान मौसम विभाग की ओर से लगाए जाते हैं।मौसम के पूर्वानुमान के लिए हाई-स्पीड कंप्यूटर, मौसम संबंधी उपग्रह और मौसम रडार अहम भूमिका निभाते हैं। इनके जरिए सटीक डेटा प्राप्त करने में मदद मिलती है और धीरे धीरे इन टेक्नोलॉजी में सुधार हो रहा है और उसका नतीजा है कि मौसम विभाग का अनुमान सटीक होता जा रहा है।

सीधे शब्दों में कहें तो मौसम पूर्वानुमान के लिए सबसे पहले मौसम और मौसमी आंकड़ों से संबंधित सूचनाएं प्राप्त की जाती है। इसके साथ ही हवाओं के रुख के जरिए तापमान, दाब, आर्द्रता आदि के बारे पता किया जाता है। इसके साथ ही इसमें डॉप्लर रडार के आंकड़ों का भी इस्तेमाल होता है और फिर डेटा विश्लेषण के साथ मौसम भविष्यवाणी होती है।