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श्रद्धा मर्डर केस में आफताब पर होगा नार्को टेस्ट ,यहां जाने कैसे होता है नार्को टेस्ट
 

आफताब पूनावाला जिसने कथित तौर पर अपनी प्रेमिका की हत्या कर दी , इसके शरीर के टुकड़े कर दी उसका नार्को  टेस्ट कराया जाएगा क्योंकि पुलिस को गलत जानकारी दे रहा है और जांच को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। नार्को  एनालिसिस टेस्ट में सोडियम पेंटोथल  का इंजेक्शन शामिल होता है जिसेट्रुथ सीरम भी कहते हैं इस दवा का प्रशासन किसी व्यक्ति आत्म चेतना को कम करता है जिससे उन्हें बिना किसी प्रतिबंध के बोलने की अनुमति होती है यह तब होता है जब व्यक्ति  कम आत्म जागरूक होता है औरकृत्रिम निद्रावस्था में प्रवेश करता है। यह चरण परीक्षकों को विषय पर प्रश्न करने और वास्तविक उत्तर प्राप्त करने की अनुमति देता है। 

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यह किसी मनोवैज्ञानिक जांच अधिकारियों की निगरानी में ही किया जाता है। इसे जांच विभागों द्वारा उपयोग किए जाने वाले अन्य सामान्य रूप से ज्ञात थर्ड-डिग्री उपचारों का एक विकल्प कहा जाता है जाने के बाद ही परीक्षा आयोजित की जाती है। 

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कैसे किया जाता है नार्को टेस्ट?


विषय के चिकित्सकीय रूप से फिट पाए जाने के बाद ही परीक्षा आयोजित की जाती है।व्यक्ति को ही हिप्नोटिक सोडियम पेंटोथल का इंजेक्शन लगाया जाता है जिसे थियोपेंटोन के नाम से भी जाना जाता है और आप उनकी उम्र लिंग  और अन्य चिकित्सा की स्थितियों पर की जाती है। 

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नार्को टेस्ट करने के क्या है तरीका


 नार्को  टेस्ट करने के लिए पेंटोथल का इंजेक्शन देने की सही मात्रा की खुराक देना बहुत जरूरी है गलत तरीके से खुराक की ज्यादा मात्रा या मृत्यु ,कोमा  का कारण बन सकती है। टेस्ट कर आते समय भी कई सावधानियां बरतनी होगी एक बार दबा इंजेक्ट करने के बाद व्यक्ति को उस स्थिति में रखता जाता है जहां वे केवल विशिष्ट प्रश्नों का उत्तर दे सके। सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि एक आरोपी पर नार्को-एनालिसिस, पॉलीग्राफ और ब्रेन मैपिंग टेस्ट अवैध हैं अदालत ने हालांकि, आपराधिक मामलों में सहमति पर और कुछ सुरक्षा उपायों के साथ ऐसी तकनीकों के उपयोग की अनुमति दी। 

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भारत में पहली बार 2002 में गोधरा कांड के मामले मेंनार्को  एनालिसिस का इस्तेमाल किया गया थ।  2003 में अब्दुल करीम तेलगी को तेलगी स्टांप पेपर घोटाले में परीक्षण के लिए ले जाया गया था हालांकि तेलगी  के मामले में बहुत सारी जानकारियां जुटाई गई थी लेकिन सबूत के तौर पर इसके महत्व को लेकर संदेह जताया गया था कुख्यात  निठारी सीरियल कांड के दो मुख्य आरोपियों का गुजरात के गांधीनगर में भी नार्को  टेस्ट हुआ  था।