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द्रोपदी मुर्मू बनी देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति ,इतना कुछ खोकर भी कैसे उन्होंने खुद को बनाया मजबूत ,यहां जाने
 

ओडिशा पार्षद के रूप में अपना सार्वजनिक जीवन शुरू करने वाली आदिवासी नेता द्रोपदी मुर्मू देश की राष्ट्रपति बन गई है वह राष्ट्रपति की बनने वाली पहली भारतीय आदिवासी महिला है जबकि इस पद पर पहुंचने वाली दूसरी महिला राष्ट्रपति है साथ ही वह इस पद पर पहुंचने वाली सबसे कम उम्र की भी है। 

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झारखंड के पूर्व राज्यपाल और राष्ट्रपति पद के लिए भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के उम्मीदवार मुर्मू ने विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा  पर आसान जीत हासिल की भारत की 15वीं राष्ट्रीय स्वतंत्रता के बाद पैदा होने वाली भारत की पहली राष्ट्रपति भी होंगी 25 जुलाई को शपथ लेंगी चमक-दमक और प्रचार से दूर रहने  वाली मुर्मू ब्रह्मकुमारियों का ध्यान तकनीकों की गहन अभ्यासी हैं उन्होंने यह गहन अध्यात्म और चिंतन का दामन उस वक्त थामा था, जब उन्होंने 2009 से लेकर 2015 तक की छह वर्षों की अवधि में अपने पति, दो बेटों, मां और भाई को खो दिया था। 

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भाजपा नेता और कालाहांडी से लोकसभा सदस्य बसंत कुमार पांडे ने कहा कि ,वह  बहुत आध्यात्मिक  और मृदु भाषी  व्यक्ति है फरवरी 2016 में दूरदर्शन को दिए एक साक्षात्कार में मुर्मू ने अपने जीवन से जुड़े संघर्ष के बारे में बताते हुए कहा था कि, 2009 में मैंने अपने बेटे को खो दिया उस समय मेरी रातों की नींद उड़ गई जब मैं ब्रह्मकुमारी से मिलने गई तो मुझे एहसास हुआ कि मुझे आगे बढ़ना है और अपने दो बेटो और  बेटी के लिए जीना है राष्ट्रपति पद के लिए २१ जून को राजग उम्मीदवार के रूप में नामित होने के बाद से उन्होंने कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया उनकी जीत निश्चित लग रही थी उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव के लिए पूरे देश में प्रचार किया और राज्य   राज्य की राजधानियों में उनका  गर्मजोशी से स्वागत किया। 

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रायरंगपुर से ही उन्होंने भाजपा के साथ राजनीति के सोपान पर पहला पहला कदम रखा था वह 1997 में रायरंगपुर अधिसूचित क्षेत्र परिषद में पार्षद बनाई गईं और 2000 से 2004 तक ओडिशा की बीजद-भाजपा गठबंधन सरकार में मंत्री भी रहीं उन्हें 2015 में झारखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया और वह 2021 तक इस पद पर रहीं भाजपा इकाई के पूर्व अध्यक्ष मनमोहन सामल ने कहा कि ,वह बहुत तकलीफ और संघर्षों से गुजरी    है लेकिन विपरीत परिस्थितियों से नहीं घबराती है सामल ने कहा कि संथाल  परिवार में जन्मी वह संथाली और  भाषाओं में उत्कृष्टता है। 

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देश की सबसे दूरस्थ और  अविकसित जिलों में से एक मयूरभंज की रहने वाले मुरमुरे भुवनेश्वरी के रमा  देवी महिला कॉलेज से कला में स्नातक की उपाधि प्राप्त की है और ओडिशा सरकार में सिंचाई तथा बिजली विभाग के कनिष्ठ सहायक के रूप में नौकरी भी की हैमुर्मू को 2007 में ओडिशा विधानसभा द्वारा वर्ष के सर्वश्रेष्ठ विधायक के लिए नीलकंठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।