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कम्पनियाँ अब पुराने पार्ट्स को ठीक करने से नहीं कर पायेगी मना ,सरकार ला रही है ये कानून
 

केंद्र सरकार  'राइट  टू रिपेयर 'कानून लाने की तैयारी में है उपभोक्ता मामलो के  विभाग ने देश में  'राइट टु रिपेयर' फ्रेमवर्क बनाने के लिए एक कमेटी भी बना दी है इस कानून के आने के बाद कंपनी ग्राहक के  पुराने सामान को बदलने से इंकार नहीं कर सकती कंपनी यह भी नहीं कह सकती सामान पुराना हो गया हैं यानी कंपनी कस्टमर्स को नया सामान खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकती 'राइट टू रिपेयर 'में मोबाइल लैपटॉप टेबलेट जैसे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स वॉशिंग मशीन ,रेफ्रिजरेटर शामिल होंगे और  एग्रीकल्चरल इक्विपमेंट्स यानी आपकी कार के स्पेयर पार्ट्स से लेकर किसानों के काम आने वाले उपकरण भी इस कानून के दायरे में होंगे कानून लागू होने के बाद अगर किसी का लैपटॉप, टैब, वाशिंग मशीन, एसी, फ्रिज, टेलीविजन, कार जैसा कोई प्रोडक्ट खराब हो जाता है, तो उस कंपनी का सर्विस सेंटर रिपेयर करने से इनकार नहीं कर सकता कि पार्ट पुराना है  .

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 कंपनी को गेजेट  का पार्ट  बदल कर देना होगा नए कानून के बाद अब कंपनियों को किसी भी नए सामान के साथ पुराने इसे रखने होंगे इसके साथ ही पुराने पार्ट्स  को बदलकर आपके खराब सामान को भी ठीक करने की जिम्मेदारी कंपनी की ही होगी यूजर्स कंपनी के सर्विस सेंटर के अलावा कहीं भी अपने गैजेट्स को सही करवा सकते हैं किसी प्रोडक्ट के नए मॉडल अपना कोई दूसरा प्रोडक्ट बेचने के लिए और प्रोडक्ट के लिए मना कर देती है। 

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इसकी वजह सरकार के दो मकसद है पहला ग्राहकों को रिपेयरिंग ना होने की वजह से बिना जरूरत नए  प्रोडक्ट खरीदने से मुक्ति मिलेगी दूसरा इलेक्ट्रिक कचरा यानी की  वेस्ट में भी भारी कमी आएगी लोगों को 'राइट टू रिपेयर 'मिलने के बाद कंपनियों को  गेजेट्स से जुड़े सभी कागजात और मैन्युअल यूजर्स को देने होंगे कंपनी को नए के साथ पुराने प्रोडक्ट के पार्ट्स भी शामिल रखने होंगे यूजर्स कंपनी के सर्विस सेंटर के अलावा कहीं और भी अपने गैजेट ठीक करवा सके   इसके लिए प्रोडक्ट को बाजार में उपलब्ध कराने होंगे। 

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दुनिया में बढ़ते  वेस्ट को लेकर एक्सपर्ट्स काफी चिंता है इससे निपटने के लिए कई अभियान चला रहे हैं जिनमें से एक है 'राइट टू रिपेयर' मामूली खराबी होने  पर महंगे गैजेट्स फेंक दिए जाते है ये  फेंकने पड़ते हैं ऐसे में सिर्फ रिपेयरिंग ही कचरे को काफी हद तक कम कर सकती है 2021 में ही 'राइट टू रिपेयर' यूरोप नाम के संगठन ने भी  विएना शहर शहर में प्रशासन के साथ मिलकर यह वाउचर योजना चलाई थी इसके तहत पार्ट्स  को फेंकने के बजाय ठीक करवा कर दोबारा इस्तेमाल करने पर 100 रूपये  का कूपन दिया गया लोगों ने इस दौरान 26000 चीजें ठीक की गयी  इस तरह विएना   शहर का इलेक्ट्रॉनिक कचरा 3 पॉइंट 75 कम से कम हुआ।