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30 हजार की गाय बांग्लादेश जाकर हो जाती है डेढ़ लाख की ,लोग कर रहे है धड्ड्ले से गायो की तस्करी ,केले के तने के शहर करवाते है नदी पार
 

गाय बछड़ों को पश्चिम बंगाल से बांग्लादेश भेजा जा रहा है केले का पेड़ का मोटा हिस्सा उसके बीच गाय का सिर पर रस्सी से कसकर बंद है ऊपर से सिर्फ गाय का सिर  नजर आता है बाकी सब पानी में इस तरह तैरकर  कुछ ही मिनटों में गाय नदी पार कर जाती है और वहां पर पहले से मौजूद लोगों उन्हें  निकाल लेते हैं और रस्सी  खोलकर बांग्लादेश ले  जाते है इसी तरह से गाय और बछड़े को पश्चिम बंगाल से बांग्लादेश भेजा जा रहा है हर चीज के लिए कोड नेम  तय है तस्कर गाय के बछड़े को पेप्सी बुलाते हैं तस्करी का मास्टरमाइंड अनुमंडल को बताया जाता है अनुमंडल बीरभूम के नेता और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की खास है सीबीआई ने 11 अगस्त को अनुमंडल को अरेस्ट किया था एक न्यूज़ से पता चला कि भारत में 30000 में खरीदी गई गाय बांग्लादेश में डेढ़ लाख में बिकती है। 

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 रिपोर्ट  के अनुसार मुर्शिदाबाद जिले में बॉर्डर के पास एक गांव है जालंगी  इसकी बांग्लादेश से दूरी कम से कम 5 किलोमीटर से भी कम है यहां से कई साल से केट्टल स्मगलिंग हो रही है वहां पर मीडिया को भी फोटो लेने की इजाजत नहीं है पुलिस वाले मीडिया को फोन अंदर रखने का इशारा कर देते हैं वहां पर गाड़ियां गाय बछड़े लेकर जाती है पुलिस वाले इनसे रिश्वत लेते हैं और इन्हें आगे जाने देते हैं जो रिश्वत नहीं देता उसकी जांच होती है नदिया जिले के हरिन भट्ठा के बिरोही गांव में गाय बैलों की हॉट लगती है यहां पर गाय खरीदने और बेचने के लिए मैनेजर और अलग-अलग एजेंट लगे हुए हैं वहां पर मैनेजर भी इस बात का ध्यान रखते हैं कि कोई फोटो या तस्वीर  लीक ना हो  एक मुखबिरी के अनुसार जो गांव का ही है और सीआईडी सीबीआई जैसी एजेंसी से कमीशन लेकर उन्हें जानकारी देता उसने अपनी पहचान छुपा कर कई बातें मीडिया के सामने रखी है। 

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जलंगी गांव पद्मा नदी के किनारे बसा हुआ है पदमा बांग्लादेश की बड़ी नदियों में से एक है बांग्लादेश के कुष्ठिया, पबना और राजशाही जिले इससे लगते हैं। भारत में यह मुर्शिदाबाद में बहती है  कई साल से इसी नदी से कैटल स्मगलिंग हो रही है। नदी कहीं संकरी, तो कहीं चौड़ी है कहीं बहाव तेज, कहीं कम यदि कहीं सकरी तो कहीं जोड़ी कहीं बहाव तेज और कहीं कम बारिश के बाद कुछ जगहों पर यह सुख भी जाती है नदी क्रॉस कर कुछ कदम चलने पर बांग्लादेश लग जाता है बॉर्डर सिक्योरिटी बीएसएफ  भी तैनात है पर एक ऑब्जरवेशन पॉइंट पर दो ही जवान होते हैं इन्हें आधा से 1 किलोमीटर तक का एरिया संभालना होता है ऐसे में तस्करी रोकना इनके लिए भी नामुमकिन है। 

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गायों को नदी पार कराने के लिए तस्कर के लिए केले के तने का इस्तेमाल करते हैं गाय के तने में बांधकर फेंक दिया जाता है नदी के उस पार पहले से मौजूद लोग इन्हें निकालकर बांग्लादेश ले जाते हैं पद्मा नदी बांग्लादेश में गंगा की मुख्यधारा है यानी गंगा ही बांग्लादेश में पदमा हो जाती है कई साल से इस नदी के जरिए ही कैटल स्मगलिंग हो रही है बीएसएफ पुलिस ऑफिसर ने इसका वीडियो दिखाएं वीडियो में दो बंदे हैं बकड़े जी नदी में फेंक दिया जाता है तने के  बीच के हिस्से को फाड़कर बछड़ों  को उसमे  फसाया जाता है वह नदी में फेंक दिया जाता है   जवानों की नजर उन पर पड़ गई तो वे उन्हें किनारे ले आई रस्सी खोल कर उन्हें कैंप में रखा गया अफसर ने बताया कि जानवरों की तस्करी रात में होती है वक्त और जगह बदलता रहता है कई बार दिन में भी तस्करी की कोशिश होती है जब नदी में तेज बहाव होता है तब तस्करी ज्यादा एक्टिव रहती है क्योंकि उस समय निगरानी बहुत मुश्किल होती है जवान भी बॉर्डर पर नहीं रह पाते हैं। 

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इंटेलिजेंस ऑफिसर के अनुसार तस्करी गांव वालों से जूट और केले की खेती करवाते हैं   क्योंकि इन में आसानी से छुपा जा सकता है और बदले में वह गांव वालों को पैसा देते हैंबीएसएफ के एक सूत्र ने बताया कि पहली बड़ी संख्या में गाय आती थी रात में हमारे जवानों  उन्हें रोक नहीं पाते थे  क्योंकि तस्करों की संख्या ज्यादा होती है और जवानों की कम एक साथ डेढ़ से दो हजार गाय और उनके साथ 300 से 400 तस्कर तस्कर गायों को भगाते भगाते नदी में कूदा देते हैं और आसानी से पढ़ते हुए उस पार निकल जाते थे उनके पास बेम और  पिस्टल होते है भीड़ में होते थे और हमला भी कर देते थे 2018 से गायों की तस्करी थोड़ी कम हुई है लेकिन बछड़ों की मांग और डिमांड बढ़ गई है इन्हे अब केले के तने में नदी पार कराई जा रही हैक्योंकि इनके तेज बहाव में डूबने का खतरा रहता है।