घर पर खड़ी थी गाड़ी और कट गया फास्टैग, अब कोर्ट ने टोल प्लाजा पर लगाया 45 हजार रुपये का जुर्माना

Saroj kanwar
3 Min Read

देश भर में फास्टैग से जुड़ी गलत टोल कटौती की शिकायतें बढ़ रही हैं। कई वाहन मालिकों ने बताया है कि उनके वाहन घर पर खड़े होने के बावजूद उनके खाते से टोल टैक्स कट जाता है। ऐसे कई अनुभव सोशल मीडिया पर साझा किए गए हैं। हालाँकि NHAI शिकायत करने पर रिफंड देने का वादा करता है, लेकिन अक्सर शिकायतों का तुरंत समाधान नहीं होता।

जयपुर का एक मामला जिसने ध्यान खींचा

जयपुर के अशोक सैनी के साथ अगस्त 2022 में एक ऐसी ही घटना घटी। 20 अगस्त को, उन्हें अपने मोबाइल फ़ोन पर एक संदेश मिला जिसमें बताया गया था कि उनकी कार सुबह 9:42 बजे दौलतपुरा टोल प्लाज़ा पार कर गई थी और ₹55 का शुल्क कट गया था। अशोक के अनुसार, उस समय उनकी कार घर पर खड़ी थी और उसे हटाया नहीं गया था। उन्होंने पेटीएम बैंक के माध्यम से फास्टैग जारी करवाया था। इस धोखाधड़ी के बाद, उन्होंने सीधे उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई।

उपभोक्ता आयोग ने टोल प्रबंधन की लापरवाही स्वीकार की

अध्यक्ष जीएल मीणा और सदस्य सुप्रिया अग्रवाल व अजय कुमार की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि टोल प्लाज़ा प्रबंधन की ओर से स्पष्ट लापरवाही हुई थी। आयोग ने टोल प्रबंधक पर ₹45,000 का जुर्माना लगाने का आदेश दिया, साथ ही शिकायत की तारीख से निर्णय आने तक गलत तरीके से काटे गए ₹55 पर नौ प्रतिशत ब्याज भी लगाया। इस निर्णय को उपभोक्ता अधिकारों को मज़बूत करने वाला माना जा रहा है।

गलत टोल कटौती कैसे होती है?
कभी-कभी, टोल प्लाजा पर लगी स्कैनिंग मशीन वाहन पर लगे फास्टैग को पढ़ नहीं पाती। ऐसे में, लंबी कतारों से बचने के लिए, कर्मचारी मैन्युअल रूप से वाहन का नंबर नोट कर लेते हैं। जल्दबाजी या लापरवाही के कारण, कभी-कभी एक या दो अंक गलत दर्ज हो जाते हैं, जिससे किसी अन्य वाहन मालिक के खाते से राशि कट जाती है। यह समस्या पहले भी व्यापक रूप से फैली हुई थी, जिसके कारण NHAI ने एक भी गलती के लिए टोल ऑपरेटरों पर ₹1 लाख तक का जुर्माना लगाया था।
उपभोक्ताओं के लिए यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है

जयपुर का यह मामला साबित करता है कि अगर आपको गलत टोल कटौती का सामना करना पड़ता है, तो सिर्फ़ शिकायत करने और इंतज़ार करने के बजाय, उपभोक्ता अदालत जाना एक प्रभावी समाधान हो सकता है। अदालत न केवल गलत तरीके से काटी गई राशि वापस करती है, बल्कि लापरवाह प्रबंधक पर जुर्माना भी लगाती है। ऐसे फैसले भविष्य में होने वाले मामलों को रोकने में अहम भूमिका निभाते हैं।

TAGGED:
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *